‘मजबूत शरीर एवं मन की स्थिरता के लिए योग आवश्यक’

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अविकल उत्तराखंड

नरेन्द्रनगर। शरीर को पुष्ट एवं मन की स्थिरता के लिए योगाभ्यास आवश्यक है। योग आंतरिक ऊर्जा को संरक्षित करने के साथ-साथ शरीर में ऊर्जा को नवस्फूर्ति के साथ संचारित करता है।
यह विचार प्रभारी प्राचार्य डॉ. विजय सिंह नेगी ने 15 दिवसीय योग प्रशिक्षणशाला के उद्घाटन सत्र में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

विदित हो कि धर्मानंद उनियाल राजकीय महाविद्यालय के पर्यटन विभाग के समन्वित प्रयास से नरेन्द्रनगर महाविद्यालय में योग विज्ञान विभाग, देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रशिक्षण संयोजकत्व में बुधवार को 15 दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का विधिवत प्रारंभ हो गया है।
उद्घाटन सत्र के पहले दिन योग विज्ञान विभाग, देव संस्कृति विश्वविद्यालय की प्रशिक्षिका मानसी ने योग के भौतिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए भ्रामरी प्राणायाम तथा सर्वाइकल पेन (गर्दन दर्द) के लिए महत्वपूर्ण यौगिक क्रियाओं और आसनों का प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित की।

इसके अलावा, इस १५ दिवसीय योग कार्यशाला के विभिन्न कार्यक्रमों की एक विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
कार्यक्रम का संचालन पर्यटन विभाग के प्रभारी डॉ. संजय महर ने किया। उन्होंने वर्तमान समय में योग की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए योग की महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

इस अवसर पर महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन समिति के अलावा कॉलेज के प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्रों का विशेष सहयोग बना रहा। यह जानकारी कॉलेज मीडिया समिति के सदस्य डॉ. विक्रम सिंह बर्त्वाल ने दी है।

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