हाईकोर्ट ने साक्ष्य सुरक्षित रखने का भरोसा मिलने पर याचिका निस्तारित की

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प्रदेशभर में भाजपा का ‘सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना”

पढ़ें, शुद्धिकरण विवाद में दो FIR का मामला गरमाया

पुलिस कार्रवाई पर कोर्ट ने जताया संतोष

आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं दे पा रही कांग्रेस-भाजपा

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई में शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर दायर याचिका निरस्त कर दी गयी।

देहरादून निवासी बैजनाथ की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में मामले से जुड़े वीडियो, CCTV फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के साथ प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई। 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत के सामने जांच और दर्ज FIR की स्थिति रखी तथा मामले से जुड़े वीडियो साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भरोसा दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए पुलिस जांच में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर संतोष जताया।

की कार्यवाही के बाद कांग्रेस के राजनीतिक नैरेटिव पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस मुद्दे को कांग्रेस ने उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक जोर-शोर से उठाया और राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे तक ने इसे दलित सम्मान से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा, अब उसी मामले में कांग्रेस अपने आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश नहीं कर पा रही है।

इसी प्रकरण को लेकर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पलटवार करते हुए सोमवार को प्रदेशभर में ‘सामाजिक सौहार्द संकल्प धरना’ आयोजित किया। देहरादून, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, नैनीताल, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी समेत विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस पर दलित समाज के नाम पर राजनीति करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी लगातार स्पष्ट कर चुके हैं कि इस प्रकरण से राज्य सरकार या भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है और जिस संगठन ने धार्मिक आयोजन किया, उससे सरकार का कोई संबंध नहीं है। वहीं आयोजन में दलित समाज से जुड़े लोगों की मौजूदगी की बात भी सामने आई है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा पूरे मामले को दलित अस्मिता से जोड़कर पेश करने के आधार को लेकर राजनीतिक सवाल और तेज हो गए हैं।

गौरतलब है कि बीते 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके तीन दिन बाद, 11 अगस्त को इसी मैदान में धार्मिक अनुष्ठान और गंगाजल छिड़कने का मामला सामने आया। कांग्रेस ने इसे ‘शुद्धिकरण’ बताते हुए दलित समाज के अपमान से जोड़ दिया और आरोप लगाया कि यह आयोजन खड़गे की जातिगत पहचान के कारण किया गया। दूसरी ओर भाजपा शुरू से इसे तथ्यहीन आरोप बताते हुए कांग्रेस पर संवेदनशील विषय को राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगाती रही है।

इस मुद्दे पर राहुल गांधी व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट पर एससी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद दोनों दलों के नेता व कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं।

इससे पूर्व, मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे राज्यसभा में उठाया और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला। इस तरह हल्द्वानी से उठा विवाद देहरादून होते हुए दिल्ली की राजनीति तक पहुंच गया।
हाईकोर्ट की कार्यवाही के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के उस दावे को लेकर खड़ा हो रहा है, जिसमें पूरे प्रकरण को सीधे दलित अपमान और जातिगत भेदभाव से जोड़ दिया गया था।
भाजपा प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि कांग्रेस बताए कि उसके पास ऐसा कौन-सा वीडियो, बयान, दस्तावेज या प्रत्यक्ष प्रमाण है जिससे यह साबित होता हो कि धार्मिक अनुष्ठान मल्लिकार्जुन खड़गे की जातिगत पहचान के कारण किया गया था।

शुद्धिकरण विवाद में दो FIR का मामला गरमाया

बेंगलुरु की जीरो FIR को हल्द्वानी मामले से जोड़ा गया

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में दो FIR दर्ज हैं। इनमें एक FIR हल्द्वानी में और दूसरी बेंगलुरु में जीरो FIR के रूप में दर्ज की गई है।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बेंगलुरु में दर्ज जीरो FIR को जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाना है। पुलिस मामले की जांच करेगी और घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा। सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका निस्तारित कर दी।
मामला 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की जनसभा के बाद सामने आए कथित शुद्धीकरण कार्यक्रम से जुड़ा है। आरोप है कि 11 अगस्त को वहां गंगाजल छिड़ककर हवन किया गया। इस कार्रवाई को लेकर दलित सम्मान और जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी।

इसी बीच, बेंगलुरु पुलिस ने भी कथित शुद्धीकरण को लेकर जीरो FIR दर्ज की। रिपोर्टों के अनुसार इसमें उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट सहित अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। यह FIR कांग्रेस नेता टीआर रामप्पा की शिकायत पर दर्ज की गई और इसमें अनुसूचित जाति से जुड़े कानून समेत विभिन्न धाराओं का उल्लेख है।
हालांकि, पूरे मामले में यह सवाल भी उठ रहा था कि हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण की घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर कौन-सी FIR दर्ज हुई और उसमें किन आरोपों की जांच की जा रही है। हाईकोर्ट में सरकार द्वारा दो FIR की जानकारी दिए जाने के बाद अब दोनों मामलों की जांच और उनके आपसी संबंध पर नजर रहेगी।

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