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देहरादून। लोक विरासत जनजातीय एवं लोक कला समिति’ द्वारा 11 जून को राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (जी.जी.एच.एस.एस.) बजेटी में एक दिवसीय विशेष निःशुल्क लोक वाद्य यंत्र कार्यशाला का गरिमामयी आयोजन किया गया। इस अनूठी कार्यशाला में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भागीदारी की ।
साथ ही उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू होते हुए पारंपरिक वाद्य यंत्रों, जैसे हुड़का और डोर-थाली को बजाने की बारीकियों को समझा व उनके साथ गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों के विशेष गुर सीखे।
इस अवसर पर समिति के संस्थापक पीयूष धामी ने अपने संबोधन में कहा कि युवा चाहे जितनी भी पाश्चात्य संस्कृति को अपना लें, अंत में उन्हें अपनी मूल संस्कृति और मिट्टी की ओर ही वापस लौटना होगा क्योंकि ये पारंपरिक लोक वाद्य ही हमारी असली पहचान हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन करना हम सभी का परम कर्तव्य है।

गौरतलब है कि पीयूष धामी मात्र 18 वर्ष की अल्पायु से ही इस समिति का गठन कर और इसका कुशल नेतृत्व संभालकर नई पीढ़ी को अपनी भूली-बिसरी संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं।
इस सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत कार्यक्रम में स्मृति भट्ट, प्रियंशु राज, कविता पंत सहित कई अन्य प्रबुद्ध लोग, शिक्षक और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
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