वर्षा जल संचयन से भूजल बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

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हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर यूकॉस्ट का विशेष व्याख्यान

जंगलों में आग रोकने पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा संचालित “मां धरा नमन” जल शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को परिषद सभागार में “हिमालयी पर्वतीय भूभाग में वर्षा जल संचयन के प्रयास” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि भविष्य में जल संकट की चुनौती को देखते हुए आज से ही गंभीर प्रयास करने होंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने कहा कि यूकॉस्ट द्वारा “मां धरा नमन” के अंतर्गत राज्यभर में वाटर एजुकेशन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन को जल संरक्षण तथा वैज्ञानिक अध्ययन से जोड़ना है।
कार्यक्रम संयोजक एवं यूकॉस्ट के वैज्ञानिक डॉ. भवतोष शर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए विषय विशेषज्ञ एवं पर्यावरणविद् चंदन नयाल का परिचय कराया।
तकनीकी सत्र में पर्यावरणविद् चंदन नयाल ने “हिमालयी पर्वतीय भूभाग में वर्षा जल संचयन के प्रयास” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि पिछले 15 वर्षों में नैनीताल जनपद में 6 हजार से अधिक चाल, खाल, खंतियां और पोखरों का निर्माण कर वर्षा जल संरक्षण तथा भूजल रिचार्ज का कार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि इन संरचनाओं के निर्माण से संबंधित क्षेत्रों में भूजल स्तर बढ़ा है, जंगलों में आग लगने की घटनाओं में कमी आई है तथा आसपास के जल स्रोतों और स्प्रिंग्स के डिस्चार्ज में भी वृद्धि हुई है।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने नौले-धारों के पारंपरिक विज्ञान, ग्रीष्मकाल में वर्षा जल पोषित नदियों की स्थिति, कोसी जलागम क्षेत्र में भूजल प्रबंधन तथा वर्षा जल संचयन के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने प्रोजेक्टर के माध्यम से सामूहिक रूप से सहभागिता की। इसके अलावा मानसखंड साइंस सेंटर अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों, विभिन्न शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, यूकॉस्ट के पर्यावरण एवं विज्ञान चेतना केंद्रों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों तथा विभिन्न प्रयोगशालाओं के कार्मिकों सहित 145 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

कार्यक्रम का संचालन यूकॉस्ट वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. भवतोष शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश नौटियाल ने दिया।

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