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परमार्थ निकेतन में स्वामी चिदानन्द सरस्वती के 75वें वर्ष में प्रवेश पर पर्यावरण महोत्सव
75 हजार पौधे लगाने का संकल्प
मानवता और प्रकृति सेवा को समर्पित जीवन को मिला सम्मान
अविकल उत्तराखंड
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती के 75वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर बुधवार को भव्य ‘‘पर्यावरण महोत्सव’’ का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर 75 हजार पौधों के रोपण एवं संरक्षण का महासंकल्प लिया गया। देश के प्रमुख संतों और आध्यात्मिक विभूतियों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती को शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घकालीन सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण के कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में योगऋषि स्वामी रामदेव, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि, साध्वी ऋतंभरा, स्वामी ज्ञानानन्द, महंत रविन्द्र पुरी, साध्वी भगवती सरस्वती, संत मुरलीधर, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतानन्द, स्वामी वेदविद्यानन्द, महामंडलेश्वर स्वामी ईश्वरदास, स्वामी दयाराम दास, स्वामी जयंत सरस्वती, स्वामी शुक्राईनाथ सहित अनेक संतों और श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

परमार्थ निकेतन द्वारा अवतरण दिवस को ‘‘पर्यावरण महोत्सव’’ के रूप में मनाते हुए संत मुरलीधर ने 75 हजार पौधों के रोपण और संरक्षण का संकल्प लिया। अभियान का शुभारम्भ रुद्राक्ष के पौधे के रोपण से किया गया। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने भी अपने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और अन्य विशेष अवसरों पर पौधारोपण का संकल्प दोहराया।
वक्ताओं ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती का जीवन सेवा, साधना, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का जीवंत उदाहरण है। गंगा एवं अन्य नदियों की स्वच्छता, कैलाश मानसरोवर क्षेत्र में सेवा कार्य, स्वच्छता अभियान, दिव्यांगजन सेवा, गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती पूरी मानवता के लिए प्रेरणा हैं और विश्वभर की विभूतियों का उनसे विशेष जुड़ाव है। स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने उन्हें पर्यावरण चेतना का अग्रदूत बताते हुए कहा कि उन्होंने पूरी दुनिया को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने धरती की पीड़ा को समझते हुए अपना जीवन पर्यावरण और मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। वहीं स्वामी ज्ञानानन्द ने कहा कि उन्होंने तप, त्याग और सेवा के माध्यम से राष्ट्रचेतना और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दी है।
अवतरण दिवस के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं, संतों, निराश्रितों और जरूरतमंदों के लिए महाप्रसाद वितरण भी किया गया। दिनभर सेवा, समर्पण और सद्भाव की धारा प्रवाहित होती रही।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सभी संतों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनका जीवन गुरुजनों और माता-पिता के आशीर्वाद का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि जीवन का उद्देश्य प्रेरणा बनना और मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहना है।
कार्यक्रम में देश-विदेश से जुड़े अनेक संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशिष्ट व्यक्तियों ने संदेश भेजकर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर गंगा और यमुना के तटों पर व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। आयोजकों ने कहा कि 75 हजार पौधों का यह महासंकल्प आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के जनआंदोलन का रूप लेगा।
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